स्कूल की परीक्षाए होने वाली है, छात्रो के मन में बेहतर परिणाम लाने का
दवाब रहता है, ऐसे में कही कम मार्क्स आये तो ये बात छात्रों को विचलित
कर देती है कि वे पेरेंट्स को कैसे बताएं . .
सभी छात्र एवं उनके अभिभावक चाहते हैं कि परीक्षा का रिजल्ट उनके मन
मुताबिक ही आये पर सब कुछ हमारे योजना के अनुसार नहीं होता है, परीक्षा
का परिणाम छात्रों के व्यावहारिक कुशलता, व्यक्तित्व एवं बौद्धिक कुशलता
पर काफी हद तक निर्भर करता है | पेरेंट्स बच्चों के शिक्षा में अपना समय,
पैसा एवं अपने सपने लगाते हैं; ऐसे में यदि उनके उम्मीद के मुताबिक
परीक्षा परिणाम नहीं आये तो उनका गुस्सा करना स्वाभाविक है, पर इस स्थिति
में बच्चों की स्थिति असहज हो जाती है कि वे पेरेंट्स को अपने कम मार्क्स
कैसे बताये; उनका सामना कैसे करें, कुछ छात्र लज्जित महसूस करते है एवं
अवसादग्रस्त हो जाते हैं, वहीँ कुछ छात्र इसी दवाब की वजह से अनुचित
कदम तक उठा लेते हैं |
ऐसे स्थिति के लिए कुछ सलाह दे रहें है जो काफी कारगर है –
1. अपने मार्क्स पेरेंट्स को अवश्य बताएं :
- यदि परीक्षा में आप बेहतर नहीं कर पायें है तो यह बात पेरेंट्स को
रिजल्ट आने से पूर्व ही बता दें, इससे वे कुछ गुस्सा हो सकते हैं पर
रिजल्ट आने पर पेरेंट्स असहज नहीं होंगे |
- रिजल्ट आने पर पेरेंट्स के पास पूर्ण आत्मविश्वास एवं दृढ निशचय के साथ
जाएँ एवं अपनी गलती स्वीकार करते हुए अपने निशचय एवं संकल्प के बारें में
बताएं कि आप अगली बार अवश्य ही इससे बेहतर करेंगें |
- यदि बताने में आपको घबराहट हो रही हो तो अपनी सभी बातें एक कागज पर लिख
डालें जो अपने पेरेंट्स से कहना चाहते हैं, इस प्रकार लिख लेने से आपका
तनाव कम हो जायेगा व आत्मविश्वास आएगा, फिर पेरेंट्स के पास जाकर अपनी
बात कहें , फिर भी घबराहट होने पर लिखा हुआ कागज दे दें |
2. पेरेंट्स की बात बिना तर्क दिए सुनें:
- उनके उम्मीद पर आपके खरा ना उतरने पर उनका गुस्सा होना एवं आपको
समझाना या डाँटना स्वाभाविक है ;इसलिए उनकी बातों को सुने; उन्हें बीच
में ना टोकें और ना ही कोई स्पष्टीकरण दें; आपका ऐसा करना उन्हें और
क्रोधित कर सकता है|
- अपनी गलतियों एवं कम मार्क्स के लिए बहाने एवं झूठे कारण न बनाएं, यह
स्वयं के साथ भी धोखा है | अपनी गलतियों व कमजोरी को स्वीकार करें |
- सादगी पूर्ण तरीके से अपनी कमजोरियों एवं जरूरतों को बताएं, आपके
पेरेंट्स अवश्य ही कोई समाधान निकाल लेंगें |
3. पेरेंट्स से संवाद बनाये रखें :
- कई छात्र पेरेंट्स से डांट मिलने के बाद उनसे बात करना कम कर देते
हैं; यह गलत है; पेरेंट्स का डांटना आपके प्रति स्नेह एवं आपके भविष्य के
प्रति चिंता है, वे आपको बेहतर होता हुआ देखना चाहते हैं; उसे सहज भाव से
स्वीकार करें |
- अपनी भावनाएं, कमजोरी, परेशानी, आवश्यकतायें पेरेंट्स से अवश्य शेयर
करें क्योंकि पूरी दुनिया में सिर्फ आपके पेरेंट्स ही वे व्यक्ति हैं जो
आपके लिए सब कुछ कर सकते हैं; एवं आपको चिंतामुक्त कर देंगे |
4. सुधार हेतु योजना बनायें:
- अपनी गलतियों को सुधारने एवं कमजोरियों को दूर करने हेतु अपनी योजनायें
बनाये एवं पेरेंट्स को बताएं |
- अपने टीचर, पेरेंट्स से भी सलाह लें कि आपकी स्थिति में सुधार कैसे आ
सकते हैं, दी गई सलाह पर अमल करें |
- यह सबसे उपयुक्त निर्णय है कि आप कड़ी मेहनत करने का निर्णय लें एवं
पेरेंट्स को इससे अवगत कराएँ |
- पेरेंट्स जो भी आप पर नए नियम या पाबन्दी लगायें उसे स्वीकार कर लें ,
ये आपके बेहतरी के लिए ही होंगे. कुछ अजीब नियम भी हो सकते हैं जैसे-
स्मार्ट फोन उपयोग न करना, टेलीविजन कम देखना, घुमने का समय कम करना
आदि, आप चाहें तो खुद भी ऐसे निर्णय लेकर पेरेंट्स को बता सकते हैं,
स्वयं से लिया गया निर्णय आपको बेहतर करने हेतु प्रेरित करेगा|
5. आगे की सोचें :
- जो बीत गया उसे आप बदल नहीं सकते हैं, परन्तु वर्तमान में आप आगे के
लिए समुचित तरीके से प्रयास करके भविष्य जरुर संवार सकते हैं | सबको
सम्हालने का मौका मिलता है ; आपको भी मिला है |
- अपने लक्ष्य निर्धारित करिए, पेरेंट्स की भावनाएं आपसे जुडी है, उनसे
परस्पर सलाह लेकर उपयुक्त लक्ष्य एवं योजनायें बनाइये|
अपनी समस्याएं, कमजोरी, आवश्यकतायें, परीक्षा परिणाम आदि को कभी नहीं
छुपायें, यह आदत आपको चिंतित एवं अवसादग्रस्त ही करेगा; जबकि अपनी बात
जाहिर कर देने से आप चिंतामुक्त हो जायेंगे, समाधान पाएंगे एवं खुश
रहेंगें| आपके करियर की नीव सिर्फ एक परीक्षा के परिणाम पर नहीं टिकी
है, आगे और भी मौके मिलेंगे, अपना आत्मविश्वास व पेरेंट्स के प्रति स्नेह
बनाये रखें|
पेरेंट्स ध्यान दें :
- अपने बच्चों पर परीक्षा परिणाम का अनावश्यक दवाब न बनायें बल्कि उन्हें
बेहतर करने मात्र को प्रोत्साहित करें |
- बच्चों की कमजोरी एवं आवश्यकताओं को परखें एवं उचित निर्णय लें |
- परीक्षा में कम मार्क्स आने पर बच्चों को अवश्य समझाएं, पर उनके कोमल
भावनाओं का भी ध्यान रखे, उनकी बौद्धिक कुशलता एवं योग्तानुसार उन्हें
सलाह दें |
- डा. भूपेंद्र गुप्ता
ईमेल- dr.bhupendragupta@gmail.com
We care Team
दवाब रहता है, ऐसे में कही कम मार्क्स आये तो ये बात छात्रों को विचलित
कर देती है कि वे पेरेंट्स को कैसे बताएं . .
सभी छात्र एवं उनके अभिभावक चाहते हैं कि परीक्षा का रिजल्ट उनके मन
मुताबिक ही आये पर सब कुछ हमारे योजना के अनुसार नहीं होता है, परीक्षा
का परिणाम छात्रों के व्यावहारिक कुशलता, व्यक्तित्व एवं बौद्धिक कुशलता
पर काफी हद तक निर्भर करता है | पेरेंट्स बच्चों के शिक्षा में अपना समय,
पैसा एवं अपने सपने लगाते हैं; ऐसे में यदि उनके उम्मीद के मुताबिक
परीक्षा परिणाम नहीं आये तो उनका गुस्सा करना स्वाभाविक है, पर इस स्थिति
में बच्चों की स्थिति असहज हो जाती है कि वे पेरेंट्स को अपने कम मार्क्स
कैसे बताये; उनका सामना कैसे करें, कुछ छात्र लज्जित महसूस करते है एवं
अवसादग्रस्त हो जाते हैं, वहीँ कुछ छात्र इसी दवाब की वजह से अनुचित
कदम तक उठा लेते हैं |
ऐसे स्थिति के लिए कुछ सलाह दे रहें है जो काफी कारगर है –
1. अपने मार्क्स पेरेंट्स को अवश्य बताएं :
- यदि परीक्षा में आप बेहतर नहीं कर पायें है तो यह बात पेरेंट्स को
रिजल्ट आने से पूर्व ही बता दें, इससे वे कुछ गुस्सा हो सकते हैं पर
रिजल्ट आने पर पेरेंट्स असहज नहीं होंगे |
- रिजल्ट आने पर पेरेंट्स के पास पूर्ण आत्मविश्वास एवं दृढ निशचय के साथ
जाएँ एवं अपनी गलती स्वीकार करते हुए अपने निशचय एवं संकल्प के बारें में
बताएं कि आप अगली बार अवश्य ही इससे बेहतर करेंगें |
- यदि बताने में आपको घबराहट हो रही हो तो अपनी सभी बातें एक कागज पर लिख
डालें जो अपने पेरेंट्स से कहना चाहते हैं, इस प्रकार लिख लेने से आपका
तनाव कम हो जायेगा व आत्मविश्वास आएगा, फिर पेरेंट्स के पास जाकर अपनी
बात कहें , फिर भी घबराहट होने पर लिखा हुआ कागज दे दें |
2. पेरेंट्स की बात बिना तर्क दिए सुनें:
- उनके उम्मीद पर आपके खरा ना उतरने पर उनका गुस्सा होना एवं आपको
समझाना या डाँटना स्वाभाविक है ;इसलिए उनकी बातों को सुने; उन्हें बीच
में ना टोकें और ना ही कोई स्पष्टीकरण दें; आपका ऐसा करना उन्हें और
क्रोधित कर सकता है|
- अपनी गलतियों एवं कम मार्क्स के लिए बहाने एवं झूठे कारण न बनाएं, यह
स्वयं के साथ भी धोखा है | अपनी गलतियों व कमजोरी को स्वीकार करें |
- सादगी पूर्ण तरीके से अपनी कमजोरियों एवं जरूरतों को बताएं, आपके
पेरेंट्स अवश्य ही कोई समाधान निकाल लेंगें |
3. पेरेंट्स से संवाद बनाये रखें :
- कई छात्र पेरेंट्स से डांट मिलने के बाद उनसे बात करना कम कर देते
हैं; यह गलत है; पेरेंट्स का डांटना आपके प्रति स्नेह एवं आपके भविष्य के
प्रति चिंता है, वे आपको बेहतर होता हुआ देखना चाहते हैं; उसे सहज भाव से
स्वीकार करें |
- अपनी भावनाएं, कमजोरी, परेशानी, आवश्यकतायें पेरेंट्स से अवश्य शेयर
करें क्योंकि पूरी दुनिया में सिर्फ आपके पेरेंट्स ही वे व्यक्ति हैं जो
आपके लिए सब कुछ कर सकते हैं; एवं आपको चिंतामुक्त कर देंगे |
4. सुधार हेतु योजना बनायें:
- अपनी गलतियों को सुधारने एवं कमजोरियों को दूर करने हेतु अपनी योजनायें
बनाये एवं पेरेंट्स को बताएं |
- अपने टीचर, पेरेंट्स से भी सलाह लें कि आपकी स्थिति में सुधार कैसे आ
सकते हैं, दी गई सलाह पर अमल करें |
- यह सबसे उपयुक्त निर्णय है कि आप कड़ी मेहनत करने का निर्णय लें एवं
पेरेंट्स को इससे अवगत कराएँ |
- पेरेंट्स जो भी आप पर नए नियम या पाबन्दी लगायें उसे स्वीकार कर लें ,
ये आपके बेहतरी के लिए ही होंगे. कुछ अजीब नियम भी हो सकते हैं जैसे-
स्मार्ट फोन उपयोग न करना, टेलीविजन कम देखना, घुमने का समय कम करना
आदि, आप चाहें तो खुद भी ऐसे निर्णय लेकर पेरेंट्स को बता सकते हैं,
स्वयं से लिया गया निर्णय आपको बेहतर करने हेतु प्रेरित करेगा|
5. आगे की सोचें :
- जो बीत गया उसे आप बदल नहीं सकते हैं, परन्तु वर्तमान में आप आगे के
लिए समुचित तरीके से प्रयास करके भविष्य जरुर संवार सकते हैं | सबको
सम्हालने का मौका मिलता है ; आपको भी मिला है |
- अपने लक्ष्य निर्धारित करिए, पेरेंट्स की भावनाएं आपसे जुडी है, उनसे
परस्पर सलाह लेकर उपयुक्त लक्ष्य एवं योजनायें बनाइये|
अपनी समस्याएं, कमजोरी, आवश्यकतायें, परीक्षा परिणाम आदि को कभी नहीं
छुपायें, यह आदत आपको चिंतित एवं अवसादग्रस्त ही करेगा; जबकि अपनी बात
जाहिर कर देने से आप चिंतामुक्त हो जायेंगे, समाधान पाएंगे एवं खुश
रहेंगें| आपके करियर की नीव सिर्फ एक परीक्षा के परिणाम पर नहीं टिकी
है, आगे और भी मौके मिलेंगे, अपना आत्मविश्वास व पेरेंट्स के प्रति स्नेह
बनाये रखें|
पेरेंट्स ध्यान दें :
- अपने बच्चों पर परीक्षा परिणाम का अनावश्यक दवाब न बनायें बल्कि उन्हें
बेहतर करने मात्र को प्रोत्साहित करें |
- बच्चों की कमजोरी एवं आवश्यकताओं को परखें एवं उचित निर्णय लें |
- परीक्षा में कम मार्क्स आने पर बच्चों को अवश्य समझाएं, पर उनके कोमल
भावनाओं का भी ध्यान रखे, उनकी बौद्धिक कुशलता एवं योग्तानुसार उन्हें
सलाह दें |
- डा. भूपेंद्र गुप्ता
ईमेल- dr.bhupendragupta@gmail.com
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