Monday, 7 May 2018

सक्षम महिला सशक्त समाज

सक्षम महिला सशक्त समाज
लेखिका - श्रावणी प्रभुदेसाई

भारतीय संस्कृति का असली गहना है भारतीय नारी
प्राचीन काल से हमारी इस संस्कृतीने स्त्रियों को “यत्र नार्यस्तु पुज्यन्ते रमन्ते तत्र देवा:” कहकर बहुत बडा सम्मान दिया है l धार्मिक और वैदिक कार्य में भी उसका पुरा सहयोग रहता था l उसी नारी जाती को आज अत्याचारों का सामना करना पड़ रहा है l

“बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” यह नारे सुनने में अच्छे लगते हैं लेकिन क्या सचमुच आज बेटियॉं सुरक्षित हैं? पहली बात बढती भ्रूण हत्याएँ...बच्चे का लिंग परिक्षण करके अगर लडकी हो तो उसे पेट में ही मरवाते हैंl उसे जनम लेने से पहले ही मार दिया जाता हैl दूसरी बात तो ये है कि आज भी कई जगह लड़का और लड़की में भेद करने वाले लोग हैंl लड़की को बचपन से ही नीचा दिखाते हैंl  उसे इस तरह से पाला जाता है कि उसका कोई अस्तित्व ही नही है l

तीसरी बात है लड़की के सुरक्षा की…..आजकल  लड़की की सुरक्षाकी समस्या जटिल होगई है , दिन बदिन बिगड़तीही जा रही हैl वह अपने घर तक में आसानीसे सांस नही ले सकतीl कई जगह उसे घरकी चार दीवारी में बंद कर के रखा जाता हैl आज भी उसे अबला बना कर एक उपभोग्य वस्तु की हैसियतसे देखा जाता हैl

आज २१वी सदी में लड़कीयाँ अपने ग्यान और शीक्षा के आधार पर आसमाँ छू रही हैंl उन्होनें सभी क्षेत्र में अपने पाँव जमाए रखे हैंl साहित्य, संगीत, क्रीड़ा इतनाकी हमारे देश की रक्षा मंत्री तक एक महिला है l सभी क्षेत्र में वह मर्दोंके कंधे से कंधा मिला कर चल रही हैl बल्कि कई क्षेत्र में उन से आगे भी निकल पड़ी हैl आज कोई भी क्षेत्र उसके लिए अछूता नहीं हैl लेकिन यह सवाल तो है ही कि क्या वह आज भी सुरक्षित है ? स्वतंत्रहै?

कहने को वह सुशिक्षित है, सुसंस्कृत है, बहुत बड़े पद पर कार्यरत है लेकिन आज भी अत्याचारों से उसने छुटकारा नहीं पाया है l तीन-चार साल की बच्ची से लेकर साठ पैंसठ साल की बुढ़ापेकी ओर झुकनी औरत भी आज सुरक्षीत नहीं हैl इतना ही नहीं कभी-कभी विकलांग बच्चियाँ भी इस अत्याचार का शिकार होते हैं l यह सब क्या है? मनुष्य की हो रही अधोगतूी का प्रतिक? नही तो और क्या?



आज कल रोज मर्राकी जिंदगी में सिर्फ गाँव में नहीं बल्कि बड़े बड़े शहरों में भी बलात्कार की घटनाएँ बढने लगी हैंl दिल्ली जैसे बड़े शहर में सामूहिक बलात्कार की घटनाएँ तो रोज की बात हो गई है’l हर सुबह जब अखबार देखते हैं, तो उसमें दस बारह वार्ताएँ तो बलात्कार,लैंगिक अत्याचार,महिलाओंका शारिरीक एवं मानसीक शोषण यही होती हैंl जिन्हें पढ़कर दिल बेचैन हो उठता हैl कार्यालयोंमें भी स्त्रियों को पुरुषों के लैंगिक अत्याचार सहने पड़ते हैंl और तो और हद तो इस बात की के वह पीड़ित लड़कीया स्त्री सब चुप चाप सहन करती हैl अगर उसने आवाज़ उठाने का प्रयास कि या तो उसे दबा दिया जाता है या फिर उसी को गुनहगार के भाँति देखा जाता हैl उनके प्रति देखने की हमारी मानसिकता पहले बदलनी चाहिए l उनके प्रति सहानुभूति जतानी चाहिएl उनकी मानसिक तौर पर मदद करनी चाहिएl उनके पीछे खड़े रहना चाहिएl उन्हें अपनेआपको सक्षम बनाना चाहिएl

मैं यहाँ पर मेरी एक सहेली के बारे में कहना चाहती हूँ जो इस में से गुजरी है l वह उच्चशिक्षित, उच्चपदस्थ ,पती ,एक छोटी बच्ची, सास,ससुर,देवर एक हरा-भरा  परिवार
उसकी परदेस स्थीत ननद और उस के पति किसी कारणवश भारत लौट आते हैंl एक दिन अचानक उनसे मुलाकात होती हैl इस दरम्यान उसे पता चलता है कि,उसके नंदोई को परदेस में किसी लड़कीने झूठे मामले में फँसाकर लूट लिया इसी कारण वह परदेश छोडकर वापस भारत लौट आये थेl उनकी इस दयनीय अवस्थाको देखकर वह उन्को घर लाती है उनकी मदद करती है, उन्हें उस परदेसी औरत को देने के लिए बीस लाख रुपयों की मदद करती है लेकीन उस नंदोई की नीयत अच्छी नहीं थी l वह अपने औकात पर उतर आया lजिस थाली में खाया उसी में उसने छेद किया l अपने घर में पनाह देनेवाली अपनी देवता समान भाभी के साथ बुरा बर्ताव किया l उसने कई बार अपनी ननद और घरवालों को उसके इस बुरे बर्ताव के बारे में बताया लेकीन किसीने उस पर भरोसा नहीं किया क्योंकि वह उस घर का जमाई था l लेकिन वह चुप नहीं रही lउसके पति ने उसका पूरा साथ दिया और दोनोंने मिलकर उसका भाँड़ा फोड़ डाला और उसे पुलीसके हवाले कर दियाl
अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना ही सक्षमता हैl अन्याय चुपचाप सहन करनेवाला भी उतना ही जिम्मेदार होतां है जितना करनेवाला होता हैl चुपचाप अन्याय सहन करने से अत्याचार करने वालों का हौसला बढ़ जाता है और वह और भी आगे बढने लगते हैl लड़कियोंको अन्याय, अत्याचार करनेवालोंको सहारा नहीं देना चाहिए बल्कि उनका असली रूप दुनिया के सामने लाना चाहिएl इसलिए सबसे पहले उसे स्वयं बिना किसी को घबराए हुए आवाज उठाना चाहिएlअपने आप को सक्षम बनाकर खुदकी सहायता करनी चाहिएl अगर जरूरत पड़े तो पुलीस या वकील की मदद लेनी चाहिएl खुद को जुड़ो,कराटे, तायक्वांड़ोकी प्रशिक्षण लेनी चाहिए और अपनी रक्षा खुदही करनी चाहिएl उनको आत्म सम्मान और हौसला बढ़ाना चाहिए उनको खुद ब खुद एक्सन लेने की जरूरत हैl अपने साथ हुए अन्याय के बारे में बिना हिचकिचाहट से बोलना चाहिए l मानसिक तथा शारीरिक रूप से बलवान होना चाहिएl अनजान आदमी से दूर रहना चाहिए किसी के ऊपर भरोसा नहीं करना चाहिएl

लड़कियों के माता-पिता की भी जिम्मेदारी है कि,अपनी लड़की कहा जाती है, किस के साथ जाती है, उसकी संगति कैसी है यह सब देखना चाहिएl हर एक आदमी को अपना सामाजिक दायित्व निभाना चाहिएl अगर किसी लड़की के साथ कोई बुरा बर्ताव कर रहा हो तो तुरंत उसे टोकना चाहिए, जरुरत पड़े तो पुलीस की मदद लेनी चाहिएl हर एक लड़की को अपनी माँ-बहनकी नजरिये से देखना चाहिए और उनका सम्मान करना चाहिएl लड़कियों को भी किसी सुनसान जगह पर या कहीं पर भी अकेली घूमने के बजाय अपने घरवालोंके साथ घूमना चाहिएl  किसी के भी बहकावे में आकर कुछ उलटा-सिधा कदम नहीं उठाना चाहिए l अकेली बाहर जाते समय अपने साथ अपने बचाव के लिए कुछ न कुछ चीजें रखनी चाहिएl


मनोरंजनके साधन जैसेकी,चित्रपट,दूरदर्शनमाली का जो अश्लील चित्रपट,गाने,संवाद प्रदर्शित कर के लड़कियों की प्रतिमा मलीन कर रहें हैं ऊनके ऊपर रोक लगानी चाहिएl अब जरूरत है जनजागरण की तभी एक सुसंस्कृत समाज तैयार होगा लेकिन सब अच्छे काम की शुरूआत तो अपनेही घर से होनी चाहिएl तो उठो,चलो,अपने आपको सशक्त तथा सक्षम बनायेंl


No comments: